“आंधी”🍃💨

आंधी तो तुम्हारे घर भी आती होगी

आधी तो माना तुम्हारे घर भी आती होगी

छत को हिलाया होगा
उसने

तुम्हरे खिड़कियां भी झुलाई होंगी

।।आंधी तो तुम्हारे घर भी आती होगी।।

डर के मेरे बारे में भी सोचा होगा

तुमने

डर के सांसें भी थाम ली होंगी

।।आंधी तो तुम्हारे घर भी आती होगी।।

हाथ मेरा उस समय थामने का सोचा होगा

तुम में

मेरी आवाज़ सुनने की तड़प भी जागी होगी

।।आंधी तो तुम्हारे घर में भी आती होगी।।

मोमबत्ती को जला तुमने मेरा चेहरा सोचा होगा

मुझसे

मेरी मौजूदगी भी मांगी होगी

।।आंधी तो तुम्हारे घर भी आती होगी।।

होता है क्या? तुम्हे भी दरवाज़े की खटखट आहट से

मेरे आने का इंतज़ार

मेरे आने की आस तुमने जरूर लगाई होगी

।।आंधी तो तुम्हारे घर भी आती होगी।।